गीता विश्व का सबसे बड़ा दार्शनिक ग्रंथ है-सुषमा स्वराज

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कुरुक्षेत्र (सुधीर सलूजा)18 दिसम्बर- केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए प्रत्येक युवा को पवित्र ग्रंथ गीता का संदेशवाहक बनना होगा। इसके लिए प्रत्येक युवा को गीता में जीना होगा और प्रत्येक दिन इस ग्रंथ के कम से कम 2 श्लोकों को अपने जीवन में धारण करना होगा। हमें चाहिए कि इस पवित्र  ग्रंथ  गीता के 18 अध्यायों के सांझे सूत्र कर्म का जीवन में कभी त्याग न करेें और कर्म करने में कभी अहंकार न करेें और न ही कभी फल की इच्छा करें। इन तमाम पहलुओं को अपने जीवन का आधार बनाकर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान थीम पार्क में आयोजित वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थी।
श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता विश्व का सबसे बड़ा दार्शनिक ग्रंथ है। इस ग्रंथ को दार्शनिक इसलिए कहा जाता है कि क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकली वाणी से ही इस ग्रंथ की रचना हुई। इतना ही नहीं पूरे विश्व में पवित्र  ग्रंथ  गीता ही एकमात्र ही ऐसा  ग्रंथ  है जो जीवन जीने की राह दिखाता है और दुनिया की तमाम समस्याओं का निदान करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस  ग्रंथ का एक-एक श्लोक मनुष्य को संस्कारवान बनाता है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र को गीता स्थली के रूप में पूरे विश्व में जाना जाता है। पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश उसी समय में ही सार्थक नहीं थे, अपितु आज के युग में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। गीता के वैश्विक सिद्धांत समाज को जीवन जीने का सार बताते हैं। इस ग्रंथ की महिमा अपरमपार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से गीता जयंती उत्सव को पिछले 3 सालों से  अंतर्राष्ट्रीय  महोत्सव का दर्जा मिला है और कुरुक्षेत्र विश्व के नक्शे पर आ गया है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव कुरुक्षेत्र में ही नहीं, हरियाणा के प्रत्येक जिले में मनाया जा रहा है। इसके अलावा दुनिया के विभिन्न देशों में गीता महोत्सव को लेकर भारतीय समयानुसार वैश्विक गीता पाठ किया जा रहा है। इस गीता पाठ से पूरे विश्व को प्रेरणा मिलेगी और मनुष्य का आंतरिक रूप से भी विकास होगा।

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