डी यू चुनाव में एन डी टी एफ उम्मीदवारों का नामांकन, स्थायित्व /समायोजन के साथ दिल्ली सरकार के वित्त पोषित कॉलेजों में ग्रांट की समस्या बडे मुद्दे|

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नई दिल्ली ,शिक्षक संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के उम्मीदवारों ने दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद और अकादमिक परिषद के चुनाव में अपना नामांकन दाखिल कर दिया है| एन डी टी एफ ने ई सी चुनाव में लगातार दूसरी बार अपने निवर्तमान सदस्य डॉ वी एस नेगी को उम्मीदवार बनाया है| अकादमिक परिषद के लिए संगठन ने सात सदस्यीय पैनल को चुनावी मैदान में उतारा है|जिसमें ए आर एस डी कॉलेज में राजनीति विज्ञान के शिक्षक डॉ शंभू नाथ दुबे, दयाल सिंह कॉलेज में राजनीति विज्ञान के सुनील कुमार शर्मा, श्यामलाल कॉलेज कॉमर्स विभाग के डॉ अशोक कुमार यादव, कालिंदी कॉलेज कॉमर्स विभाग की शिक्षिका डॉ नैना हसीजा, विधि विभाग से डॉ नरेंद्र बिश्नोई, जाकिर हुसैन में हिंदी विभाग से डॉ अनिल शर्मा और हिन्दू कॉलेज में कैमिस्ट्री विभाग के डॉ सुदर्शन कुमार शामिल है|
एन डी टी एफ के अध्यक्ष डॉ. ए के भागी ने बताया कि उनके संगठन ने दस साल से अधिक समय तक लम्बित पड़ी प्रमोशन की शुरुआत कराने में सार्थक भूमिका निभाई है| जिसके परिणामस्वरुप आज दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग तीन हजार शिक्षकों के प्रमोशन हो चुके हैं| अभी एसोसिएट प्रोफेसर स्तर तक प्रमोशन हो रहा है| विश्विद्यालय के विभागों में भी सीनियर प्रोफेसर के लिए प्रमोशन आरम्भ हो चुकी है| जल्द ही इसके और गति पकडने की संभावना है| शीघ्र ही कॉलेजों में प्रोफेसर बनने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है|
डॉ भागी के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षकों की सेवा – शर्तों और सरकारी अनुदान के मामले में उनका संगठन किसी भी रूप में समझौते के मूड में नहीं है| जहां तक विद्यार्थियों को बेहतर विकल्प और सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात है तो संगठन नई शिक्षा नीति का समर्थन करेगा| उनके अनुसार एन डी टी एफ इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस में शिक्षक और शोधकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने का पक्षधर है| किसी भी हालत में शिक्षकों के हितों को लेकर नई शिक्षा नीति से समझौता नहीं किया जाएगा| एन डी टी एफ की प्रतिबद्धता है कि विश्वविद्यालय में सामाजिक और लैंगिक न्याय सुनिश्चित हो|
डॉ भागी ने कहा कि एन डी टी एफ के चुनावी एजेंडे की प्राथमिकता में तदर्थ शिक्षकों के समायोजन /स्थायित्व, छठे वेतन आयोग की विसंगतियां, सातवें वेतन आयोग की एनोमली ,दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों में वेतन एवं ग्रांट की समस्या सहित अनेक शिक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं| .
एन डी टी एफ महासचिव डॉ वी एस नेगी के अनुसार चुनाव में उनका संगठन शिक्षकों के महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और इनके लिए निरन्तर प्रयासरत है| उन्होंने बताया कि कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर के स्तर पर प्रमोशन में पीएचडी से छूट, प्रमोशन में ओरियंटेशन व रिफ्रेशर कोर्स से छूट , प्रोफेसर के लिए शोध – पत्र में राहत, एसोसिएट प्रोफेसर की प्रमोशन तक तदर्थ सेवा का लाभ, आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए तदर्थ शिक्षकों का/स्थायित्व समायोजन , ईडब्ल्यूएस विस्तार के शिक्षक पदों और फंड को जारी करना, पेंशन से संबंधित समस्याओं के साथ ओबीसी के सेकंड ट्रांस के पद जैसे मुद्दों के समाधान के लिए लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं|.
डॉ वी एस नेगी ने कहा कि दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित एवं आंशिक वित्तपोषित कॉलेजों में वेतन एवं ग्रांट की समस्या पिछले साल से बहुत भयावह हो गई है| कई कॉलेजों में अभी भी वेतन की समस्या बरकरार है| उनकी दिल्ली सरकार से मांग है कि इन कॉलेजों में समय पर वेतन एवं अन्य ग्रांट जारी हो| अगर दिल्ली सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारी पूरी तरह से नहीं निभा पाती है तो इन कॉलेजों को दिल्ली विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा अधिग्रहण किया जाना चाहिए| दिल्ली सरकार के वित्त पोषित कॉलेजों में वेतन और ग्रांट की समस्या इस बार चुनाव में एक बड़ा मुद्दा होगा| डॉ नेगी ने बताया कि लाइब्रेरियन, फिजिकल एजुकेशन टीचर और ओएमएसपी से जुड़े अनेक मुद्दों के समाधान के लिए भी एन डी टी एफ प्रतिबद्ध है|

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