हरियाणा प्रदेश में जल शोधन परियोजनाओं के विस्तार व जल शोधन प्रक्रियाओं को सक्षम किए जाने में केंद्र सहयोग करेगा।

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 नई दिल्ली, दिनांकः 22-06-2018 (सुधीर सलूजा): हरियाणा प्रदेश में जल शोधन परियोजनाओं के विस्तार व जल शोधन प्रक्रियाओं को सक्षम किए जाने में केंद्र सहयोग करेगा। हरियाणा मलशोधन प्रक्रियाओं में तकनीकी सक्षमता को प्राथमिकता देगा।
                      हरियाणा के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग विभाग द्वारा End of Pipe Treatment of Waste Entering River Yamuna & Ghaggar ' विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में हरियाणा में मलशोधन की वर्तमान स्थितियों, आवश्यकताओं,नदियों में शुद्ध पानी की निरंतरता व सीवरेज व्यवस्था के विस्तार पर व्याख्यान दिए। विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भी तकनीकी बिंदुओं पर व्याख्यान दिए।
            केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव श्री यू पी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा को मलशोधन परियोजनाओं के विस्तार व जल शोधन प्रतिक्रियाओं को सक्षम किए जाने में केंद्र सहयोग करेगा। केंद्रीय सचिव ने देश व हरियाणा में भूजल के दोहन, नदियों में सीवरेज पानी निकासी, सतही जल प्रदूषण, मलशोधन संयंत्रों की क्षमताओं का पूर्ण उपयोग व अन्य संदर्भित विषयों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जल के दोहन बारे जनमानस को जागरूक किए जाने पर बल दिया। केंद्रीय सचिव ने समग्र जल प्रबंधन सूचकांक बारे भी कार्यशाला में जानकारी दी।
                      हरियाणा के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजीव अरोड़ा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए मलशोधन प्रक्रियाओं में तकनीकी समाधानों के विस्तार पर बल दिया। हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मलशोधन की वर्तमान स्थितियों व  आवश्यकताओं का विवरण देते हुए हरियाणा को सभी द्वारा सहयोग किए जाने की अपेक्षा  की । राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव रंजन मिश्रा ने लुप्त होती जा रही  विभिन्न प्रकार के परंपरागत वाटर बाॅडीज को पुनर्जीवित करने पर  बल दिया। उन्होंने नमामि गंगे योजना के प्रमुख उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला।उन्होंने नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत यमुना नदी के पुनरुद्धार बारे भी संक्षिप्त विवरण दिया। शोधित सीवरेज जल के पुनः उपयोग के क्षेत्र को विस्तार देना भी उनके व्याख्यान में शामिल रहा।
        राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी अध्यक(तकनीकी) श्री डी पी मथुरिया ने नमामि गंगे परियोजना पर प्रकाश डाला। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग,हरियाणा के इंजिनीयर-इन चीफ श्री मनपाल सिंह ने भी अपना संबोधन किया।
                 कार्यशाला में काडा(कमांड एरिया डेवलेपमेंट अथाॅर्टी के मुख्य अभियंता श्री राजीव बंसल ने यमुना व घघ्गर नदी में गिरने वाले  ड्रेनों में प्रवाहित जल के लक्षणों व सूक्ष्म सिंचाई पर व्याख्यान दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक श्री आर एम भारद्वाज ने यमुना व घघ्गर में छोड़े जाने वाले सीवरेज जल के शोधन के मापदंडो बारे तथा जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफैसर श्री सिराजुदूदीन अहमद ने अपशिष्ट जल शोधन तकनीकों के चयन बारे व्याख्यान दिया। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण इंजिनीयर श्री जे पी सिंह ने प्रदूषण को कम करने में चुनौतियां  व उद्योगों द्वारा किए जाने आवश्यक शोधन के परामर्श, हरियाणा के सलाहकार श्री हरमिल सिंह ने  सिंचाई में शोधात्मक जल का उपयोग  विषय पर व्याख्यान दिया।
     कार्यशाला में केंद्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान के डाट रमन शर्मा,ब्लू स्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के कंसल्टेंट श्री होलानी राजेन्द्र, ,,तालाब प्राधिकरण,,विश्वराज इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ,नागपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमित जैन, सपींट टैक्नो कंल्सलटेंट,अहमदाबाद के श्री समीर शाह विभिन्न संदर्भित विषयों पर व्याख्यान दिए।

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