नब्बे के दशक से राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास तक के सफर पर एक नजर |

A look at the journey from the nineties to the foundation stone of Ram temple construction.

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नई दिल्ली (सुधीर सलूजा) 134 साल पुराना अयोध्या विवाद नब्बे के दशक में सबसे ज्यादा उभार पर था| तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने 12 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकालने की घोषणा की| इस रथयात्रा को 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से शुरू होकर 10000 किलोमीटर का सफर तय करके गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार होते हुए 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में समाप्त होना था | इस रथ यात्रा में भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठन शामिल हुए| भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से यह यात्रा शुरू हुई | पहले ही दिन 300 किलोमीटर की यात्रा की गई और आडवाणी जी ने एक ही दिन में 6 सार्वजनिक रैलियों को संबोधित किया | इस यात्रा से प्रेरित होकर हिंदू धर्म के लोग जागरूक हुए और एक बार फिर अयोध्या में विवादित ढांचे के स्थान पर राम मंदिर के निर्माण का आंदोलन भारत का सबसे बड़ा जन आंदोलन बन गया| आडवाणी जी की यात्रा सोमनाथ से चलकर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश होते हुए बिहार पहुंची |जहां बिहार सरकार ने आडवाणी जी को गिरफ्तार कर लिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग 150000 कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया |उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे| परिणाम स्वरूप उत्तर प्रदेश के कई शहरों में दंगे शुरू हो गए | 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाई गई |जिसमें कई लोग मारे गए और उत्तर प्रदेश, जयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, बड़ौदा व हैदराबाद सहित कई जगह दंगे शुरू हो गए| 24 जून 1991 को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव की सरकार चली गई और भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बन गए | उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बार फिर राम जन्मभूमि आंदोलन तेज हो गया | इस समय पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे| 6 दिसंबर 1992 को एक बार फिर अयोध्या में कार सेवा की तारीख तय की गई और देश भर से कारसेवक अयोध्या के लिए कूच करने लगे| 6 दिसंबर 1992 रविवार की सुबह लाखों कारसेवक देश के अलग-अलग राज्यों से लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार और अशोक सिंघल के नेतृत्व में अयोध्या में पूजा की बेदी पर पहुंचे |यहां कारसेवा होनी थी | कुछ मिनट बाद आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी राम कथा कुंज की तरफ बढ़े | इसी दौरान भीड़ में से कुछ युवक विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़ गए और देखते ही देखते पूरी भीड़ बेकाबू हो गई | लाखों कारसेवकों ने 5 घंटे में विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया| पूरे उत्तर प्रदेश में कर्फ्यू लगा दिया गया और कई शहरों में दंगे शुरू हो गए, जिसमें कई कारसेवकों को जान गंवानी पड़ी| पाकिस्तान से इस घटना की प्रतिक्रिया में कई मंदिरों को तोड़ने की खबर आई| कुछ समय बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया| 9 नवंबर 2019 दिन शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय की 5 जजों की बेंच ने 5-0 से एकमत होकर विवादित स्थल को मंदिर का स्थल मानते हुए फैसला रामलला के पक्ष में सुनाया | इसके अंतर्गत विवादित भूमि को राम जन्मभूमि माना गया और मस्जिद के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का आदेश सरकार को दिया गया| अब वहां पर भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण होगा | 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे|

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