खेती में ड्रोन व रोबोटिक तकनीकों के समावेश की आवश्यकता-डॉ अभिलक्ष लिखी

Drones and robotic technologies need to be included in agriculture - Dr Abhilaksh likhee

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हिसार, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव डॉ अभिलक्ष लिखी ने खेती में ड्रोन व रोबोटिक तकनीकों के समावेश किए जाने की बात पर बल दिया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने फसलों में पोषकता के साथ-साथ पेस्टिसाइड व इंसेक्टिसाइड मैनेजमेंट को भी खेती के लिए वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत बताया है। वे बुधवार को हिसार में उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान दौरा कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनों और उपकरणों का निरीक्षण करते हुए किसानों के साथ बातचीत भी की और उनकी प्रतिक्रियाएं ली।
डॉ लिखी ने खेती में ड्रोन व रोबोटिक तकनीकों के समावेश से पोषकता, पेस्टिसाइड व इंसेक्टिसाइड मैनेजमेंट को लेकर उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान के निदेशक डॉ मुकेश जैन को एग्रीटैक कंपनियों के साथ मिलकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में रोबोट द्वारा इंटरक्रोपिंग तथा ड्रोन के द्वारा स्पे्र व अन्य कार्यों को सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसलिए मंत्रालय देश में भी अगले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव चाहता है, ताकि देश के किसानों की आर्थिक दशा को सुधारा जा सके। इसके लिए उन्होंने इस दिशा में स्टार्टअप उद्यमियों को भी संस्थान से जोडऩे पर जोर दिया, ताकि खेती में दशकों से चली आ रही परंपरागत तकनीकों को आधुनिक तकनीकों के साथ बदला जा सके। अतिरिक्त सचिव ने पेस्टिसाइड व इंसेक्टिसाइड मैनेजमेंट को लेकर किसानों को भी विभिन्न प्रचार माध्यमों से जागरूक करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार से उन्होंने खेती में ऑर्गेनिक फॉर्मिंग व माइक्रो इरिगेशन के महत्व को समझते हुए जरूरी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए।
अतिरिक्त सचिव डॉ लिखी ने संस्थान के निदेशक को कहा कि गावों में बहुत से पढ़े-लिखे युवा है, जिन्हें उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान में कृषि मशीनों का प्रशिक्षण देकर इतना सक्षम बनाया जा सकता है, जिससे कि वे अपने गावों में खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का रख-रखाव कर सकें। इससे उन्हें अच्छी आमदन भी होगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में 3 से 6 महीने के प्रशिक्षण कोर्स का डिजाइन तैयार किया जाए।

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