‘सरहद पार से आई खुशबू’ के सम्मानार्थ ‘यादें 1947’ कार्यक्रम का आयोजन पानीपत में हुआ

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पानीपत, 24 जून 2018 (सुधीर सलूजा):  आर्य कॉलेज की सभागार में सरहद के पार से आई खुशबू नामक समारोह का आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी व विशिष्ट अतिथि उपायुक्त सुमेधा कटारिया थी. देश के विभाजन से जुड़े दर्द पर आधारित इस समारोह में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर चंद्र त्रिखा ने अध्यक्षता की व मंच की कमान प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर रश्मि कटारिया ने संभाली. देशभक्ति पर आधारित इस समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर वंदे मातरम के साथ हुआ.
समारोह में विधायक रोहिता रेवड़ी ने कहा की आईबी शिक्षा समिति की ओर से यादें 1947 व सरहद के  पार से आई खुशबू नामक समारोह आयोजित करके एक सराहनीय कार्य किया है. इस समारोह ने निश्चित रूप से 1947 के विभाजन की यादें पुनः ताजा कर दी है. भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. यहां की सभ्यता व संस्कृति सबसे श्रेष्ठ मानी जाती थी, लेकिन विभाजन की एक लकीर ने  रिश्तो को तार तार कर दिया. वह परिवार जो अपना घर बार, जमीन जायदाद,   जमा  जमाया कारोबार पाकिस्तान छोड़कर आए थे उस दर्द  को लोग आज भी याद करते हैं और लाख कोशिशों के बाद भी वह दर्द भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने बताया कि विभाजन के बाद जो रेलगाड़ियां पाकिस्तान से चली उनमें से एक गाड़ी में उनका परिवार भी था. उन्होंने बताया हमारे परिवार को  रोहतक  जिला अलॉट हुआ था. फिर कारोबार की तलाश में उनका परिवार पानीपत में स्थापित हो गया क्योंकि वह लोग खड्डी के व्यापार से भली-भांति परिचित थे. उसके बाद धीरे धीरे सभी लोगों का व्यापार चलने लगा और आगे की बात आप सब लोग जानते हैं.
डीसी सुमेधा कटारिया ने विभाजन को काला अध्याय बताते हुए कहा कि जन्मभूमि सभी को प्यारी होती है मनुष्य अपनी जन्म भूमि स्थान को सबसे अधिक प्यार करता है जहां उसका बचपन बीता होता है. उन्होंने कहा की आईबी शिक्षण संस्था ने यह कार्यक्रम आयोजित करके एक सराहनीय कार्य किया है.
समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर चंद्र  त्रिखा ने बताया कि विभाजन के समय उपायुक्त सुमेधा कटारिया के पिता रेलवे स्टेशन पर एक यात्री ट्रेन से पाकिस्तान से भारत आ रहे लोगों का  स्वागत करने के लिए स्टेशन पर गए परंतु बदकिस्मती से उस ट्रेन में एक भी  यात्री जिंदा नहीं था, उनके पिता ने न केवल उन यात्रियों के शवों का विधिवत दाह संस्कार करवाया बल्कि उनकी अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार गए. इनकी मां ने शरणार्थी परिवारों की महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर भी खुलवाएं ताकि इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके.
समारोह में महात्मा कांता देवी प्रेम मंदिर, केशव मेहता, परमवीर ढींगड़ा, सुभाष गुप्ता, अशोक नागपाल, धर्मवीर बत्रा, गौरव लिखा आदि मौजूद रहे.

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