एनडीटीएफ ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अकादमिक परिषद के द्वारा अंग्रेजी ऑनर्स पाठ्यक्रम में किए गए संशोधन और अनुमोदन का किया स्वागत

NDTF welcomes the amendment and approval made by the Academic Council in Delhi University in the English Honors Curriculum

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नई दिल्ली, नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अकादमिक परिषद के द्वारा अंग्रेजी आनर्स पाठ्यक्रम में किए गए संशोधन और अनुमोदन का स्वागत किया है।गौरतलब है कि 2019 में कार्यकारी परिषद के द्वारा गठित सक्षम निगरानी समिति ने इस अंग्रेजी पाठ्यक्रम में बहुत कम किंतु सार्थक संशोधन किए हैं।समिति ने सभी संबंधित अकादमिक हितधारकों से परामर्श कर जो सुझाव प्रस्तुत किए उन्हें अकादमिक काउंसिल में उपस्थित सदस्यों ने बहुमत से अपनी स्वीकृति प्रदान की।ज्ञात हो कि कुल 125 सदस्यों में से 87 उपस्थित थे।कुल उपस्थित सदस्यों में केवल 15 सदस्यों ने इन संशोधन के विरोध में अपना मत दिया।यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंग्रेजी विभाग के कुछेक सदस्यों ने अकादमिक स्वायतता का दुरुपयोग हिंदुत्व को बदनाम करने और खलनायक बनाने,समाज में विभिन्न जातियों के बीच वैमनस्य पैदा करने तथा आदिवासियों और अन्य के बीच हिंसक माओवाद और नक्सलवाद को प्रोत्साहित करने के लिए किया है।कई हितधारकों ने वैधानिक आपत्तियां की।अपने एजेंडे में नाकामयाब होकर लोग राजनीतिक शोर शराबा कर रहे हैं।
द्रौपदी महाश्वेता देवी रचित मूलत बंगाली कहानी है जिसे गायत्री सपिवाक ने अंग्रेजी में अनुदित किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में कई वर्ष से यह कहानी पढ़ाई जा रही है। कहानी के शीर्षक से लेकर उसमें जिस तरीके से अशिष्ट चित्रण किया गया है उसमें हिंदू धर्म को नीचा दिखाने का क्षुद्र प्रयास है। कहानी की भाषा और विवरण भी आपत्तिजनक हैं।
नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट को वामपंथ के इस झूठ पर आपत्ति है कि दलित साहित्य को हटाया गया है दरअसल पाठ्यक्रम में वे सभी लेखक शामिल हैं जो मूल पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं जिसे अकादमिक परिषद की बैठक में अनुमोदित किया गया था।अंग्रेजी विभाग अध्यक्ष की संस्तुति और सहमति से इस कहानी को रुकैया सखावत हुसैन की सुलताना ड्रीम से प्रतिस्थापित किया गया है।रमाबाई रानाडे के लेखन का उनकी कथित निम्न जाति से न जुड़े होने के कारण वामपंथियों का विरोध उनकी मानसिकता को दर्शाता है।रमाबाई का महिला आंदोलन और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।उन्होंने सभी जातियों की महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य किया।
नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट अकादमिक स्वतन्त्रता और स्वायतता का पक्षधर है।लेखक और शिक्षाविद यथोचित रूप से लिखने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अराजकता में फर्क होना चाहिए।अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अकादमिक पाठ्यक्रमों में वामपंथी विचारधारा के वर्चस्व की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। वामपंथियों ने कई ऐसे लेखकों का हमेशा विरोध किया जो उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाते।तुलसीदास की रामचरितमानस,प्रेमचंद की कहानी जिहाद वामपंथ को स्वीकार्य नहीं रही।वामपंथियों का उद्देश्य समाजिक और धार्मिक संघर्ष को बढ़ाना है जबकि नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट सामाजिक समरसता और राष्ट्रीयता का पक्षधर है।

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