पंजाबी से पहले खुद को कहें हरियाणवी, राष्ट्रहित रखें सर्वोपरी : मनोहर लाल खट्टर

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अंबाला (सुधीर सलूजा)  28 अप्रैल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पंजाबी से पहले खुद को हरियाणवी कहें। राष्ट्रहित रखना ही व्यक्ति के लिए सर्वोपरि है। वे रविवार को शहर के शुकल कुंड रोड पर स्थित खन्ना पैलेस में हरियाणा पंजाबी महासंघ की कार्यकारिणी की 46 वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग अपनी बिरादरी के बारे में सबसे पहले बताते हैं जोकि गलत है। सभी को पहले अपने प्रदेश और देश का नाम पहले बताना चाहिए। जिस देश के लोगों में राष्ट्रवाद की भावना प्रबल होती है। वह देश हमेशा सुरक्षित रहता है। उसे विकास करने से कोई नहीं रोक सकता। सम्मेलन को प्रेरणादायी बताते हुए खट्टर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि पंजाबियों ने विभाजन के बाद सनातन की पीड़ा आंखों से देखी व झेली है। बावजूद इसके राष्ट्रवाद नहीं छोड़ा। सबकुछ छोड़कर भारत माता की गोद में बैठना उचित समझा। तीन कपड़ों के साथ आए थे। वीरर हकीकत राय, गुरू तेग बहादुर की कुर्बानियां देखी। लेकिन अपनी संस्कृति को छोड़ने से मना कर दिया। मनोहर लाल ने अपने जीवन का वृतांत सुनाया कि 1947 में आजादी के सात साल बाद उनका जन्म हुआ। उनके पिता व दादा ने सरकारी स्कूल में मजदूरी की। पाई-पाई एकत्रित की। अपने मेहनत से दोबारा मुकाम हासिल किया। बिरादरी का मतलब होता है बुराईयों से लड़ना। समाज में सबके साथ मिलकर काम करना। देश सबसे पहले अराध्य है। पंजाबी में सभी बिरादरियां शामिल हैं। सभी को जात-बिरादरी से पहले राष्ट्रहित सोचना चाहिए। देश व प्रदेश पहले होते हैं बिरादरी व जात-पात बाद में। समाज से जुड़े बिना राष्ट्र का विकास संभव नहीं है। कटारिया के मुताबिक उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को मेहनत से अपने अनुकूल किया है। परिश्रम का ही फल है कि पहले 1000 पुरुषों के पीछे 850 महिलाएं थी जोकि कठोर निर्णय के बाद 922 तक पहुंच चुकी हैं। स्वच्छ भारत अभियान के जिक्र के साथ उन्होंने प्रदूषण रहित भारत के लिए सहयोग की अपील की। कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीपशिखा प्रज्जवलन व गायत्री मंत्र से की गई।

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