प्रयागराज में अखाड़ों का शाही स्नान, लाखों लोगों ने लगाई आस्था की पहली पवित्र डुबकी।

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प्रयागराज (सुधीर सलूजा) दिनांक 15-1-2019, आज मकर सक्रांति के पर्व पर प्रयागराज में सभी 13 अखाड़े क्रमवार शाही स्नान कर रहे हैं। प्रयागराज में शाही स्नान जारी है और शाम 4:00 बजे तक चलेगा। साधु-संतों के साथ लाखों लोग भी आस्था के कुंभ में डुबकी लगा रहे हैं। इस बार पहली बार किन्नर अखाड़ा भी शाही स्नान में भाग ले रहा है।
सभी 13 अखाड़ों को तीन वर्गों में बांटा गया है। सन्यासी, बैरागी और उदासीन। सबसे पहले सन्यासी अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, इसके बाद बैरागी और अंत में उदासीन के अंतर्गत आने वाले संत शाही स्नान करेंगे।
सन्यासी अखाड़ों के संन्यासियों के शाही स्नान की शुरुआत सुबह 6.15 बजे शुरू होगी। सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री पंचायती अटल अखाड़ा के संत स्नान के लिए अपने अखाड़े से 5.15 बजे प्रस्थान करेंगे। इन अखाड़ों के संन्यासियों को 6.15 बजे शाही घाट पहुंचना होगा। 40 मिनट के भीतर स्नान करके संन्यासियों को 6.55 बजे लौटना होगा। इसके बाद 7.55 बजे तक इन अखाड़ों के संतों,अचार्यों और महामंडलेश्वरों को अपने शिविर में पहुंचना है।
इसके बाद सुबह 7.05 बजे निरंजनी एवं आनंद अखाड़े के संन्यासी शाही घाट पर पहुंचेंगे। उन्हें भी 40 मिनट में स्नान करके 7.45 बजे लौटना होगा। तीसरे नंबर पर जूना, अग्नि और आवाहन अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे। इन्हें सुबह आठ बजे शाही घाट पर पहुंचना होगा और 40 मिनट में स्नान करके 8.40 बजे घाट प्रस्थान करना होगा।
इसके बाद बैरागी अखाड़ों के अंतर्गत आने वाले अखाडों के संत शाही स्नान करेंगे। इसमें अनी अखाड़ों के तीनों अखाड़ों में से सबसे पहले पंच निर्मोही अनी अखाड़ा 10.40 बजे घाट पर पहुंचेंगे। इन्हें आधे घंटे का समय दिया गया है। इसके बाद दिगंबर अनी अखाड़ा के संत 11.20 बजे शाही स्नान को पहुंचेंगे। इन्हें 50 मिनट का समय दिया गया है। वहीं पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा को घाट पर 12.20 बजे पहुंचना है। इनके संतों के लिए भी आधे घंटे का ही समय दिया गया है।
अंत में उदासीन अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, लेकिन बड़ी बात यह है कि उदासीन के संतों को स्नान के लिए सबसे अधिक एक घंटे का समय दिया गया है।
वहीं सबसे बड़े जूना अखाड़ों को शाही स्नान के लिए सिर्फ 40 मिनट का समय दिया गया है। जूना अखाड़े के हजारों नागा संन्यासियों को इस समय सीमा में डुबकी लगाकर लौटना पड़ेगा। इतने ही समय में संन्यासियों को घाट भी खाली करना पड़ेगा क्योंकि जूना के बाद बैरागी संतों को स्नान करना है। बैरागी संतों की संख्या भी एक लाख से ऊपर है। इतने कम समय में जूना अखाड़े के संन्यासियों का स्नान कराना प्रशासन के लिए चुनौती है। बता दें कि जूना अखाड़े के शाही स्नान को देखने के लिए श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा उत्सुकता है। जूना अखाड़े में किन्नर अखाड़े के शामिल होने से लोगों में उत्सुकता और बढ़ गया है।
प्रशासन द्वारा इस बार सभी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है और कड़े प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध हैं । इस कुंभ में लगभग 15 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की  संभावना है।

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