ब्रह्म सरोवर,यहां से ब्रह्मा ने की थी ब्रह्मांड की रचना, भगवान कृष्ण भी लगाते थे डुबकी.अर्जुन को यहां मिला था गीता का ज्ञान .

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सूर्यग्रहण और गीता जयंती के दौरान यहां लाखों की संख्या में भक्तगण डुबकी लगाने आते हैं।

  • भारत के पौराणिक और गौरवमयी इतिहास में हरियाणा का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदेश का गौरवशाली इतिहास संस्कृति, कला, विकास और सुनी-अनसुनी कहानियों से भरा हुआ है। यहां के कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा गया था।  कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर में  भगवान ब्रह्मा ने एक यज्ञ कर ब्रह्मांड की रचना की थी।
    ब्रह्म सरोवर एक पवित्र जलाशय है। यहां भगवान शिव का एक मंदिर भी है जहां एक पुल के माध्‍यम से पहुंचा जा सकता है। यह सरोवर 1800 फीट लंबा और 1400 फीट चौड़ा है। जनश्रुति है कि यहां से कभी भगवान ब्रह्मा ने एक यज्ञ कर ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए ब्रह्म सरोवर को सभ्यता का उद्गम स्थान भी माना जाता है।
    लाखों श्रद्धालु आते हैं डुबकी लगाने
    इस सरोवर को नबंवर माह में गीता जयंती के दौरान सजाया जाता है। दिसंबर माह में यहां दीपदान का आयोजन किया जाता है, जिसमें पानी में जलते हुए दीपों को बहाया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस कुंड में डुबकी लगाने से एक अश्वमेघ यज्ञ कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। सूर्यग्रहण और गीता जयंती के दौरान यहां लाखों की संख्या में भक्तगण डुबकी लगाने आते हैं।
    भगवान कृष्ण भी आते थे इस सरोवर में डुबकी लगाने
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्यग्रहण के दौरान भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम, और बहन सुभद्रा के साथ इस कुंड में स्नान करने के लिए आते थे। इतना ही नहीं कौरवों और पांडवों ने भी कई बार इस कुंड में पवित्र स्नान किया हैं।

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