भारत अपने लिए नहीं बल्कि विश्व कल्याण के लिए ताकतवर बनना चाहता है – राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली, 28 अक्टूबर, 2018 : भारतीय संस्कृति एवं एकजुटता ही भारत की ताकत है। भारत केवल अपने लिए ताकतवर नहीं बनना चाहता बल्कि विश्व के पूरे मानव समाज के कल्याण के लिए ताकतवर बनना चाहता है, ये उक्त बातें *भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह* ने रोहिणी के जापानी पार्क में चल रहे अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के समापन सत्र के दौरान कही।
उन्होंने आगे कहा कि आर्य समाज के इस सम्मेलन में अनुशासन और शान्ति है, यह केवल संस्था नहीं बल्कि क्रांतिकारी विचार है जो सोए हुए आदमी को भी जगा दें। हम तो आर्य हैं और पूरे विश्व को आर्य बनाना चाहते हैं।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि महर्षि दयानंद जी का ह्रदय जितना बड़ा था, कल्पना नहीं की जा सकती। उन्हें अपनी चिंता नहीं थी बल्कि उनका मन दूसरों की चिंता हमेशा लगा रहता था। वसुधैव कुटूंबकम का संदेश कोई छोटे मन वाला आदमी नहीं दे सकता बल्कि बड़े मन वाला ही ऐसा कर सकता है। यही तो भारत की सांस्कृतिक पहचान है। वृक्ष न काटना, बेटियों को पढ़ाना ये हमारे देश की संस्कृति है। महर्षि दयानंद जी काफी दूरदर्शी थे, उन्हें पता चल गया था कि आगे क्या होने वाला है। जो कुछ भी ज्ञान हमारे वेदों में है वो दुनिया के पास नहीं है। भारत की संस्कृति स्वयं में आधुनिक है और इसे आधुनिकता की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने लोगों को आश्वासन दिलाते हुए कहा कि मैं मोदी जी से बात करूंगा और मुझे विश्वास है कि वो इस चीज में अपनी सहमति देंगे कि 2024 में जो अंतर्राष्ट्रीय आर्य सम्मेलन होगा, उसमें दयानंद सरस्वती जी की जन्म शताब्दी पूरे विश्व में मनाई जाए।

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