अयोध्या फैसला – रामलला को विवादित जमीन और मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन- सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली (सुधीर सलूजा) सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों रंजन गोगोई, एस ए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस ए नाजेर लगातार 40 दिन मिलकर सुनवाई की और 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित कर लिया | आज नौ नवंबर को पांचो जजों की सहमति से फैसला सुनाया गया | फैसले में विभिन्न बिंदुओं पर विचार करते हुए न्यायाधीश ने
शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज की | जिससे सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा मजबूत हो गया |
कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मीर बाईक ने करवाया |
हिंदुओं का केस विश्वास पर आधारित है, उनका विश्वास है कि अयोध्या राम जन्मभूमि है |

निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया | निर्मोही अखाड़े का सेवा के अधिकार का दावा था जो कि कोर्ट ने खारिज कर दिया |
कोर्ट ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट सही है, बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं थी, खुदाई में मिला ढांचा गैर इस्लामिक था |
मस्जिद बनाने के लिए मंदिर गिराया गया, यह साफ नहीं है |
अयोध्या में राम पैदा हुए, इसमें कोई विवाद नहीं है|
हिंदू आस्था के गलत होने के प्रमाण नहीं है और राम जन्म के प्रमाण हैं |

इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि विवादित जमीन रामलला को दी जाए और मुस्लिमों को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन दी जाए तथा सुन्नी वक्फ बोर्ड को वैकल्पिक जमीन देने का भी आदेश दिया है |निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया और कहा कि केंद्र सरकार को 3 महीने में एक ट्रस्ट बनाना होगा |

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