बेटियों व महिलाओं ने संभाली कमान तो साफ नजर आए गांव।

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हिसार (सुधीर सलूजा):-  उपायुक्त अशोक कुमार मीणा के मार्गदर्शन में 1 अगस्त से शुरू हुए सघन स्वच्छता अभियान में बेटियों व महिलाओं की भागीदारी के चलते ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर और फिजा बदली-बदली नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से स्कूल-कॉलेज की छात्राओं और गांवों की महिलाओं की सहभागिता बढ़ने से गांव की गलियों में फैले गोबर, सड़कों के किनारे लगे कूड़े के ढेर गायब हो गए हैं और स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र तथा स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक भवन भी साफ नजर आने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि उपायुक्त अशोक कुमार मीणा के आह्वान पर ग्रामीण क्षेत्र के स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत 1 अगस्त से जिला के सभी 9 खंडों में दो-दो टीमें गठित करके प्रतिदिन जिला के 18 गांवों की सफाई का शैड्यूल बनाया गया था। इस कार्य को सफलतापूर्वक व गंभीरता से सिरे चढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई थी। अभियान के तहत संबंधित गांव में कार्यरत सभी सरकारी कर्मचारियों ने, जिला से जाने वाली टीम, एनएसएस के विद्यार्थियों, गर्वित युवाओं, नेहरू युवा केंद्र के सदस्यों , स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं तथा अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान गांव की गलियों, फिरनी, स्कूल, धार्मिक स्थान, आंगनवाड़ी व स्वास्थ्य केंद्र तथा गांव के प्रवेश द्वार के साथ-साथ गांवों को जोड़ने वाली मार्केटिंग बोर्ड तथा पीडब्ल्यूडी बीएंडआर की सड़कों की भी सफाई की गई।
जैसे-जैसे अभियान ने गति पकड़ी, गांव के लोगों, विशेषकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से यह अभियान प्रशासनिक न रहकर सार्वजनिक हो गया। इसके पश्चात गांव-गांव स्वच्छता की लहर चली और स्वच्छता टीमों द्वारा अब तक लगभग 300 गांवों में ग्रामीणों के साथ मिलकर सफाई अभियान चलाते हुए गांव को साफ-सुथरा किया गया। गांव की महिलाओं ने झाड़ू व तसले लेकर गलियों से गोबर व कूड़ा उठाया और रेहडि़यों के माध्यम से इसे गांव के बाहर निकाला गया। इसी प्रकार सड़कों के किनारे लगे कूड़े व कुरडि़यों के ढेर उठाने के लिए जेसीबी मशीनों व ट्रैक्टर-ट्रालियों को लगाया गया।
उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने बताया कि प्रशासन का प्रयास है कि जिला के सभी गांव साफ-सुथरे हों। इसके लिए सघन स्वच्छता अभियान चलाकर ग्रामीणों की भागीदारी के साथ सभी गांवों को स्वच्छ किया गया है। इसके साथ ही लोगों को प्रेरित किया गया है कि वे सफाई को अपनी आदत में शामिल करें और अपने गांव की सफाई की जिम्मेदारी खुद उठाएं। जिलावासियों ने जिस प्रकार इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया, वह काबिले-तारीफ है।

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