मासिक धर्म में कुछ गलत नहीं, यह सामान्य शारीरिक प्रक्रिया: चेतल

0
1168

उकलाना में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर पैडमैन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित।

उकलाना, 19 जुलाई। महिलाओं को मासिक धर्म आना सामान्य प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इस पर हमें चर्चा करने से शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए और इसकी स्वच्छता की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह बात सीटीएम शालिनी चेतल ने उकलाना के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के लिए शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए कही। जिला में चलाए जा रहे नारीत्व अभियान के तहत आयोजित पैडमैन ट्रेनिंग के तहत विभिन्न विभागों की महिला अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया।

महिला स्वास्थ्य से जुड़ा अहम मुद्दा:

सीटीएम ने कहा कि प्रत्येक परिवार बीमारियों पर अनिवार्य रूप से हजारों रुपये खर्च कर देता है लेकिन महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में सैनेटरी पैड की खरीद पर प्रतिमाह 50-100 रुपये भी खर्च नहीं किए जाते हैं जो चिंता व विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि जब हमारी बेटियां माउंट एवरेस्ट को फतेह कर सकती हैं तो उनके स्वास्थ्य के नाम पर हम 50-100 रुपये क्यों नहीं खर्च कर सकते हैं। जब इस विषय पर महिला अधिकारी व कर्मचारी घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक करेंगी तो इस पर चर्चा से हिचक खत्म होगी और स्कूलों से बच्चियों के ड्रॉप-आउट की समस्या भी कम होगी।

चर्चा से क्यों बचते हैं:

सीटीएम शालिनी चेतल ने बताया कि मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा सबसे अहम विषय है लेकिन आज तक हम सब इस पर चर्चा करने से बचते रहे हैं। अब अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म पैडमैन से यह मामला चर्चा का विषय बना है और लोग इस पर बात करने लगे हैं। इस विषय में महिलाओं व लड़कियों को जागरूक करने के लिए ही जिला में नारीत्व प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस कार्य में सामाजिक संस्था व्योमिनी भी सहयोग कर रही है।

प्राची कौशिक ने दिए सवालों के जवाब:

व्योमिनी संस्था की एमडी प्राची कौशिक व मास्टर ट्रेनर कोमल ने बताया कि उनकी संस्था पिछले पांच सालों से माहवारी की सुरक्षा व महिला स्वास्थ्य के प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है। इस समय संस्था 10 राज्यों में क्रियाशील है। संस्था द्वारा मासिक धर्म के प्रति जानकारी का प्रसार, सैनेटरी पैड खरीदने की महिलाओं की क्षमता तथा पर्यावरण की रक्षा जैसे पहलुओं के आधार पर अभियान चलाया जाता है। उन्होंने मासिक धर्म के संबंध में महिलाओं से व्यापक विचार-विमर्श किया और उनके सवालों के तर्क के साथ जवाब दिए।

कई भ्रांतियां की दूर:

उन्होंने बताया कि मासिक धर्म के प्रति महिलाओं में अनेक भ्रांतियां हैं। पीरियड्स के दौरान आचार को हाथ लगाने, मंदिर, पूजाघर या रसोई में प्रवेश करने तथा व्रत आदि रखने को वर्जित बताया जाता है लेकिन ये सब मिथ्या धारणाएं व बेबुनियाद बाते हैं। उन्होंने समाज में फैली हर भ्रांति का क्रमवार ढंग से वैज्ञानिक पद्धति से खंडन करते हुए इसकी असलियत महिला प्रशिक्षकों को बताई। उन्होंने कहा कि पीरियड्स आना वरदान है, अभिशाप नहीं। इसे कभी भी छिपाना नहीं है बल्कि चर्चा करके इसे अच्छे स्वास्थ्य का माध्यम बनाना है।

कैसर जैसी बीमारियां भी होती हैं:

उन्होंने कहा कि भारत में 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं आज भी मासिक धर्म के दौरान अस्वच्छ कपड़ा या अन्य चीजों का इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने से पनपने वाला बैक्टीरिया उनमें कैंसर रोग तक पैदा कर देता है और महिलाओं की मां बनने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पूनम रमन सहित अन्य कई अधिकारियों ने भी इस विषय पर महिलाओं को जागरूक किया और उनकी भ्रांतियों को दूर किया। वर्कशॉप में उकलाना खंड की सीडीपीओ वीना चौपड़ा सहित महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की महिला अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद थीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here