तदर्थ शिक्षकों के समायोजन की मांग को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने धरने का किया आयोजन

Delhi University Teachers Association organizes a sit-in to demand adjustment of ad-hoc teachers

0
310

दिल्ली ,दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर धरने का आयोजन किया गया। डूटा ने कार्यरत तदर्थ शिक्षकों के समायोजन की मांग को लेकर इस धरने का आयोजन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय और सम्बद्ध कॉलेजों में लगभग साढ़े चार हजार से अधिक तदर्थ/अस्थाई शिक्षक विभिन्न पूर्णकालिक, अनुमोदित और स्वीकृत पदों पर असुरक्षित नौकरी और सामाजिक असुरक्षा के बीच कार्य कर रहे हैं।
डूटा अध्यक्ष डॉ. ए. के. भागी और डूटा कार्यकारिणी सदस्य और वरिष्ठ शिक्षक प्रतिनिधियों के नेतृत्व में आयोजित धरने में सेंकड़ों शिक्षकों ने भागीदारी की। धरने में शिक्षकों को संबोधित करते हुए डा ए के भागी ने समायोजन की मांग जाएज बताते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से समायोजन के मामले में हस्तक्षेप की मांग की। डूटा सचिव डॉ सुरेंद्र सिंह ने कहा की सरकार को संज्ञान लेकर यू. जी. सी. और शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर एकबारगी समायोजन की रूपरेखा तैयार कर अध्यादेश/बिल लाना चाहिए।

समायोजन समानता, शिक्षक गरिमा, लैंगिक समानता और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक –


डूटा ने समायोजन की मांग पर जोर देते हुए कहा कि समायोजन समानता,शिक्षक गरिमा,लैंगिक समानता और दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होगा। धरने पर डूटा ने मांग की कि दिल्ली विश्वविद्यालय और यू. जी. सी. पांच दिसंबर 2019 के रिकॉर्ड ऑफ़ डिस्कशन को लागू करे। दिल्ली विश्वविद्यालय और सम्बद्ध कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के आरक्षण के लागू होने पर पच्चीस प्रतिशत अतिरिक्त पदों की स्वीकृति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के आरक्षण को पूर्वप्रभावी रूप से लागू न किया जाए।
धरने को कई डूटा एग्जीक्यूटिव, शिक्षक नेताओं सहित वरिष्ठ शिक्षकों ने सम्बोधित किया। पूर्व डूटा अध्यक्ष डॉ अदित्य नारायण मिश्रा एवं डॉ राजीब रे ने इस समस्या के समाधान के लिए डूटा द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में सभी शिक्षकों से भागीदारी की अपील की। विद्वत परिषद सदस्य सुनील कुमार ने कहा कि समायोजन के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाए जाने की आवश्यकता है। कई तदर्थ शिक्षकों ने भी धरने को सम्बोधित करते हुए अपने अनुभव और भावनाएं साझा की ताकि उनकी आवाज सम्बन्धित अधिकारियों तक पहुंचे और उनकी लंबित मांगों का समाधान हो सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here