शिक्षकों और विद्यार्थियों से ही बड़ा बनता है शिक्षण संस्थान

Educational institution becomes bigger than teachers and students

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नई दिल्ली, 3 सितंबर। शिक्षक दिवस के अवसर पर भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) में सोमवार को ‘शिक्षक अभिनंदन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस मौके पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने संस्थान के समस्त शिक्षकों को शॉल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक आशीष गाेयल एवं डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह भी उपस्थित रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि काेई भी शिक्षण संस्थान अपने अध्यापकों और विद्यार्थियों से ही बड़ा बनता है। आईआईएमसी के श्रेष्ठ प्राध्यापकों के अथक प्रयास से ही हम लगातार कई वर्षों से पहले स्थान पर हैं। संस्थान के समस्त शिक्षकों के मार्गदर्शन और सहयोग से ही आईआईएमसी अकादमिक गुणवत्ता के मानकों को स्थापित करने में सफल रहा है।

आईआईएमसी के महानिदेशक के अनुसार समय के साथ शासकीय शिक्षण संस्थानों में बदलाव हुए हैं। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की जगह निजी विद्यालय एवं महाविद्यालय लोगों की पसंद बन रहे हैं। ऐसे समय में शासकीय शिक्षण संस्थाओं में काम करने वाले समस्त शिक्षकों का दायित्व बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि समाज के आखिरी व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने की जिम्मेदारी शासकीय शिक्षण संस्थाओं की है। इसके लिए सभी शिक्षकों को ईमानदारी और प्रामाणिकता के साथ अपना काम करने की जरुरत है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आईआईएमसी ने मीडिया शिक्षण, प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में अपनी एक अलग जगह बनाई है। मीडिया क्षेत्र की जरुरतों के हिसाब से हमने पाठ्यक्रमों को निरंतर अपडेट किया है। यही कारण है कि आईआईएमसी के पूर्व छात्र आज देश ही नहीं, विदेशों के भी मीडिया, सूचना और संचार संगठनों में नेतृत्वकारी भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों को आत्मप्रेरणा से ही संस्थान को आगे लेकर जाना है और मॉडल पाठ्यक्रम का निर्माण करना है।

कार्यक्रम में मंच संचालन डाॅ. मीता उज्जैन ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रचना शर्मा ने दिया। आयोजन में संस्थान के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। इस मौके पर प्रो. सुनेत्रा सेन नारायण, प्रो. आनंद प्रधान, प्रो. शाश्वती गोस्वामी, प्रो. अनुभूति यादव, प्रो. वीके भारती एवं प्रो. प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहे।

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